भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत समर्थक

यदि कोई कह रहा है अन्ना-केजरीवाल के बीच लड़ाई है तो ये गलत है

नई दिल्ली/रालेगण सिद्धि। अन्ना हजारे का एक वीडियो सामने आया है। इसने अरविंद केजरीवाल और उनके बीच के मतभेद उजागर कर दिए हैं। वीडियो में अन्ना जनलोकपाल आंदोलन के दौरान जमा हुए पैसे के बारे में सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, बुधवार को वे सफाई देते नजर आए। अन्ना ने कहा कि उन्होंने केजरीवाल को कभी भ्रष्ट नहीं कहा। उधर, केजरीवाल ने कहा कि वीडियो सामने आने से बहुत दुख हुआ है। अन्ना और केजरीवाल के बीच जारी गतिरोध बुधवार को और गहरा गया। आप (आम आदमी पार्टी) ने सुबह आपात बैठक की।

इसमें वीडियो और इसके सामने आने के बाद की नई परिस्थितियों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद पार्टी नेताओं ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस मिलकर केजरीवाल के खिलाफ साजिश रच रही हैं। चुनावों से ठीक पहले सीडी जारी करना इसका संकेत है।

...तो चुनाव नहीं लडूंगा
वीडियो से दुखी केजरीवाल ने कहा, 'हम सच के लिए लड़ रहे हैं। मैं पहले ही कह चुका हूं कि मेरी सारी जांच करा लें। यदि एक भी पैसे का हेरफेर मिलता है तो मैं चुनाव से नाम वापस ले लूंगा।' वहीं, अन्ना ने कहा, 'यदि कोई कह रहा है कि केजरीवाल और अन्ना के बीच लड़ाई चल रही है तो यह गलत है। मैंने कभी नहीं कहा कि केजरीवाल भ्रष्ट हैं। मैंने सिर्फ यह कहा था कि आंदोलन के दौरान कई करोड़ रुपए इकट्ठा हुए थे। लेकिन मैंने उसमें से एक भी रुपया नहीं लिए। मैंने यह नहीं कहा कि पैसा केजरीवाल ने ले लिया।'

अन्ना के आरोपों का जवाब दें केजरीवाल : भाजपा
इस बाबत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल ने कहा कि जो लोग ईमानदार होने का दावा कर रहे थे उन पर उनके गुरु ही आरोप लगा रहे हैं। केजरीवाल को अन्ना के सवालों का साफ जवाब देना चाहिए।
क्या है सीडी में :
मंगलवार को जो वीडियो सामने आया वह दिसंबर 2012 का बताया जा रहा है। इसमें अन्ना कह रहे हैं, 'आंदोलन के दौरान करीब तीन करोड़ रुपए जमा हुए लेकिन मैंने एक रुपया नहीं लिया।Ó अन्ना के पूर्व ब्लॉगर राजू पारुलेकर का दावा है कि अन्ना की मांग थी कि इस रकम में से उन्हें हिस्सा चाहिए। लेकिन इसकी सीडी बना ली गई और केजरीवाल अब अन्ना को ब्लैकमेल कर रहे हैं।
यह सीडी विरोधी दलों की नयी चाल है. यह ग़लतफहमी पिछले साल ही दूर कर ली थी 

अरविंद केजरीवाल मेरा दुश्मन नहीं है : अन्ना

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नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने मंगलवार को कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल उनके दुश्मन नहीं हैं और वह उनसे बात करने को तैयार हैं।

अन्ना ने संवाददाताओं से कहा, "हम दुश्मन नहीं हैं। मुझे नहीं पता वह मुझसे बात करना चाहते हैं। मैं अरविंद केजरीवाल से बात करने को तैयार हूं।"

केजरीवाल को लिखे अपने पत्र पर स्पष्टीकरण देते हुए हजारे ने कहा, "मुझे बताया गया था कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के दौरान मेरे नाम पर सिम कार्ड जारी किए गए थे, जिनकी बिक्री से कोष एकत्र जुटाए गए। इससे मेरा कोई संबंध नहीं है।"

हजारे ने कहा, "मैंने महसूस किया कि मेरे नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है, इसलिए मैंने पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा। पैसों में मेरी कोई रुचि नहीं है, केवल मेरे नाम का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।"

अन्ना ने अपने गांव रालेगण सिद्धी में मीडिया से बातचीत में अब कहा कि मेरे नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है। आम आदमी पार्टी क्यों दावा कर रही है कि 29 दिसंबर को दिल्ली में अन्ना के जनलोकपाल बिल को लागू किया जाएगा।

इसके अलावा अन्ना ने उनके नाम पर जारी किए गए सिम कार्ड को भी फिर से उठाया है। अन्ना ने अरविंद केजरीवाल की तरफ से पार्टी के कामकाज के लिए रखे गए पदाधिकारियों को दिए गए वेतन पर भी सवाल दागा है।

वहीं अरविंद केजरीवाल ने आज कहा है कि उन्होंने अपने गुरु (अन्ना) से बात करने की कई बार कोशिश की है, लेकिन बीच के कुछ आदमियों ने ऐसा नहीं होने दिया। अन्ना पर केजरीवाल ने सफाई देते हुए कहा है कि अन्ना को गुमराह करने के पीछे कांग्रेस और बीजेपी का हाथ है।

उधर, अन्ना के उठाए गए सवालों का जवाब लेकर रालेगणसिद्धी गए कुमार विश्वास ने कहा कि अन्ना के पास दिल्ली से कुछ गलत पोस्टर पहुंचाए गए, जिससे पूरा विवाद सामने आया। उन्होंने कहा कि यह किसी षडयंत्र का हिस्सा है। अन्ना जल्द ही अरविंद केजरीवाल से बात भी करेंगे।

वहीं अरविंद केजरीवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों पर एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस और बीजेपी उनके खिलाफ साजिश कर रही है।

केजरीवाल ने बताया कि अन्ना ने पूछा कि आंदोलन के पैसे का क्या हुआ तो उन्होंने बताया कि वह आंदोलन के दौरान ही खत्म हो गया था। इसके साथ ही चंदे का पूरा ब्यौरा हमारी वेबसाइट पर मौजूद है। मेरे पूरे पैसे की जांच करवा लें। अगर मैं दोषी हुआ तो चुनाव नहीं लड़ूंगा।

केजरीवाल ने कहा कि जहां तक अन्ना कार्ड के पैसों की बात है तो उससे 9 लाख रुपये इकट्ठे हुए थे, वे पैसे पहले ही खर्च हो चुके थे।

गौरतलब है कि समाजसेवी अन्ना हजारे ने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि मुझे पता चला है कि आपका सारा अभियान इस तरह चलाया जा रहा है कि जैसे कि उसे मेरा समर्थन हो।

इसके जवाब में केजरीवाल ने अन्ना को जवाब दिया कि आपकी मनाही के बाद किसी भी प्रचार में न आपकी तस्वीर है, न आपका जिक्र। केजरीवाल ने लिखा कि इसमें सिर्फ 2011 के अन्ना आंदोलन की बात है।

अन्ना ने पूछा कि आंदोलन के पैसे का क्या हुआ, वह चुनाव में तो नहीं जा रहा, केजरीवाल जवाब देते हैं कि आपसे बार−बार चर्चा हुई, आपने बार−बार ऑडिटिंग कराई, फिर ये सवाल क्यों? उसका कोई पैसा इस्तेमाल नहीं हो रहा। पैसों से जुड़ा सारा ब्यौरा साइट पर मौजूद है।

इसके अलावा केजरीवाल से अन्ना ने ऐतराज जताया था कि आपने जन लोकपाल बिल पास करने का वादा किया है, जो सिर्फ लोकसभा कर सकती है, यह विधानसभा के दायरे में नहीं आता।

लोकपाल बिल को पास कराने के मुद्दे पर केजरीवाल ने अन्ना को लिखा कि आपने उत्तराखंड और महाराष्ट्र में इस बिल का समर्थन किया, हम वही दिल्ली में कर रहे हैं और हमने इससे अलग कोई वादा नहीं किया है।

केजरीवाल पर काली स्याही फेंकने वाले को मैं नहीं जानता, यह बीजेपी कि चाल है : अन्ना

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केजरीवाल पर काली स्याही फेंकने वाले को मैं नहीं जानता, 

यह बीजेपी कि चाल है : अन्ना 

समाजसेवी अन्ना हजारे ने नई दिल्ली की प्रेस कॉन्फ्रेंस में आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर काली स्याही फेंकने वाले शख्स से खुद को अलग करते हुए कहा कि वह उसे नहीं जानते हैं।

हजारे ने कहा, 'मैं हंगामा करने वाले व्यक्ति को नहीं जानता हूं। जब मैंने समाचार देखा तो उसमें वह बीजेपी का एक कार्यकर्ता होने का दावा कर रहा था। मैं नहीं जानता कि यह व्यक्ति कौन है।'

बीजेपी कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने सोमवार को केजरीवाल और उनके पार्टी सहयोगियों पर काली स्याही फेंककर आम आदमी पार्टी की प्रेस कांफ्रेंस में खलल डाला था, जिसके बाद पुलिस उसे धारा 448, 504, और 34 के तहत अरेस्ट कर संसद मार्ग थाने ले गई। हालांकि, जमानती धाराओं में केस दर्ज होने की वजह से उसे रात करीब 1 बजे जमानत पर छोड़ दिया गया।



खुद को महाराष्ट्र के अहमदनगर की बीजेपी इकाई का महासचिव बताने वाले नचिकेता वाघरेकर का कहना था कि वह अन्ना हजारे का प्रशंसक है। उसने केजरीवाल पर अन्ना और जनता को धोखा देने का आरोप लगाया।


अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी आप के बारे में अन्ना के विचार


प्रधानमंत्री को चिठ्ठी...वर्षाकालीन सत्र में जन लोकपाल पारित करो : अण्णा हजारे।


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सेवा में, 
सम्माननीय श्रीमान् मनमोहन सिंह जी
प्रधान मंत्री,

भारत सरकार सस्नेह वन्दे।

आपके कार्यालय द्वारा श्री वी नारायण सामी जी द्वारा लिखित 24 जुलाई 2013 का पत्र प्राप्त हुआ। वर्षा कालीन सत्र में संसद में लोकपाल बिल लाने का आश्वासन आपने दिया है। ठीक है। वर्षा कालीन सत्र में यदि बिल पारित नहीं हो पाया तो मजबूरन शीत कालीन के सत्र के प्रथम दिवस से रामलीला मैदान में मेरा अनशन आरम्भ होगा। पत्र में आप लिखते हैं कि ‘‘आपको विदित होगा कि लोकपाल व लोकआयुक्त बिल लोक सभा में 27 दिसम्बर 2011 पारित हो चुका है। यही बिल बहस हेतु 29 दिसम्बर 2011 को राज्य सभा में प्रस्तुत किया गया, लेकिन उस पर राज्यसभा में ठोस निर्णय नहीं हो पाया। 25 मई 2011 को राज्य सभा ने यह बिल निरीक्षण अध्ययन हेतु एक कमेटी को सौंपा। उक्त कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 23 नवम्बर 2012 को दी। ’’ पत्र में आपने यह भी बताया है कि ‘‘आपको सूचित करना चाहता हूं कि इस रिपोर्ट के प्राप्त होने पर केन्द्र सरकार ने राज्य सभा के सचिव को लोकपाल व लोक आयुक्त बिल 2011 में उक्त रिपोर्ट में किये गए सुझाव व सिफारिशों के अनुसार अधिकृत संशोधन करने हेतु तथा राज्य सभा के बजट सत्र में बिल को पारित कराने हेतु आवश्यक निर्देश भी दिये। किन्तु बजट सत्र में यह बिल नहीं आ पाया।’’

मेरे दिल में कुछ सवाल जो उठ रहे हैं...। रामलीला मैदान में जब मेरा अनशन चल रहा था, तब जन लोकपाल के समर्थन में देश भर में से करोडों की संख्या में लोग सडक पर उतर आये थे। अनशन के 12 दिन होने पर 27 अगस्त 2011 को संसद में सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित हुआ। प्रधान मन्त्री जी, आपने ख़ुद मुझे अपना हस्ताक्षरांकित पत्र भेज कर अनशन छोडने का आग्रह किया था। शीघ्रातिशीघ्र जन लोकपाल बिल लाने का आश्वासन भी आपने दिया था। आपके आश्वासन व लोक सभा के प्रस्ताव पर पूरा भरोसा रख कर मैंने अनशन समाप्त भी किया। मुझे अफसोस है कि इस बात को दो वर्ष पुरे हो रहे है। अब तक जन लोकपाल बिल का कोई अता पता नहीं है। आप पत्र में लिखते हैं कि लोक सभा में सर्व सम्मति से बिल पारित हुआ। तत्पश्चात् राज्य सभा में 29 दिसम्बर 2011 को भेजा गया, लेकिन उस पर ठोस निर्णय नहीं हो पाया। अतीव दु:ख की बात है कि जिस मॉंग को ले कर देश की जनता करोडों की संख्या में सडक पर उतर आती है, उस पर राज्य सभा में बिल आ कर भी कुछ भी नहीं हो रहा है? इस बारे में सार्थक प्रयास करने में सरकार नाकाम रही है यह बात साफ है। इस लिए बिल आने में देर हो चुकी है।

पत्र में आपने यह भी लिखा है कि राज्य सभा द्वारा नियुक्त कमेटी ने अत्यधिक विलम्ब के बाद 23 नवम्बर 2012 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट मिलने पर केन्द्र सरकार ने राज्य सभा के सचिव महोदय को लोकपाल व लोक आयुक्त बिल 2011 में उक्त रिपोर्ट के अनुसार अधिकृत संशोधन ला कर राज्य सभा के बजट सत्र में बिल को पारित कराने हेतु आवश्यक निर्देश भी दिये। किन्तु बजट सत्र में यह बिल नहीं आ पाया। केन्द्र सरकार द्वारा राज्य सभा के सचिव को बजट सत्र में बिल पारित कराने हेतु आवश्यक निर्देश दिये जाने के बावजूद राज्य सभा सचिव द्वारा बिल राज्य सभा में बजट सत्र में नहीं पेश किया जाता है। क्यों कि हो सकता है कि सघन प्रयास करने से सरकार या तो बगलें झॉंकती रही हो, अथवा तो यह भी सम्भव है कि ख़ुद सरकार ही को इस बिल के पारित कराने में दिलचस्पी नहीं रही होगी।

फिर एक बार आपने इस पत्र में आश्वासन दिया है कि वर्षा कालीन सत्र में इस बिल को लाने के प्रयास जारी हैं। दो साल की प्रदीर्घ अवधि बीतने के पश्चात् भी फिर से आप मात्र आश्वासित ही करना चाहते हैं कि वर्षाकालीन सत्र में बिल लायेंगे। बार बार आश्वासन दिये जाते रहे हैं और उन पर अमल नहीं होता। अब तो इन आश्वासनों पर से भी मेरा भरोसा उठता जा रहा है। इसी लिए मैंने फैसला कर लिया है कि यदि आश्वासन के मुताबिक अब वर्षा कालीन सत्र में बिल नहीं आया तो मजबूर हो कर शीत कालीन सत्र के पहले ही दिन से मैं दिल्ली के रामलीला मैदान में अपना अनशन आरम्भ कर दूंगा।

धन्यवाद।

भवदीय,
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(कि. बा. उपनाम अण्णा हज़ारे)

आजादी के समय बर्खास्त होनी थीं सभी पार्टियां : अन्ना

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अन्ना हजारे


लोकपाल बिल एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहिम चला रहे गांधीवादी व सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने पिछले दिनों जबलपुर पहुंचे. जबलपुर में उन्होंने अपने भाषण के दौरान कहा कि देश के संविधान में पार्टियों का कोई उल्लेख नहीं है. अन्ना ने कहा कि पार्टियों ने जनतंत्र का अतिक्रमण किया है. आजादी के समय ही इन पार्टियों को बर्खास्त कर देना चाहिए था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने लोगों के साथ धोखाध़डी की है. ये पार्टियां कभी भी देश का भला कर ही नहीं सकतीं. अन्ना ने बताया कि आज भी देश में अंग्रेजों के बनाए कानून चल रहे हैं. अब आजादी की दूसरी लड़ाई लड़नी होगी. उन्होंने कहा कि अंगे्रजों को देश छो़डे 67 साल हो गए हैं, लेकिन आज भी अंग्रेजो का ही कानून चल रहा है. गोरों की जगह काले अफसरों का राज चल रहा है. कांग्रेस ने संविधान के विरुद्घ चुनाव कराया और जनतंत्र को नेस्तनाबूत कर दिया. लोकपाल बिल पर उन्होंने कहा कि लोकपाल बिल को लेकर कांग्रेस ने धोखा दिया है. जब तक कांगे्रस लोकपाल बिल नहीं लाती, तब तक वह इसके लिए आंदोलन जारी रखेंगे. अन्ना ने कहा कि 5-6 माह बाद वे दिल्ली में अनशन पर बैठेंगे और लोकपाल बिल को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की ल़डाई ल़डेंगे. अन्ना ने कहा कि लोकपाल पर सरकार के धोखे के कारण ही उन्हें जनतंत्र यात्रा पर निकलना पड़ा. 

सिवनी में लोगों को संबोधित करते हुए अन्ना हजारे ने कहा कि मैं पिछले साल 40 साल से अपने घर नहीं गया. मेरे भाई के लड़कों का मुझे नाम तक नहीं मालूम. मेरे लिए देश सर्वोपरि है. इसी के लिए ही मैं जिऊंगा और देश के लिए ही मरूंगा. अन्ना ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ल़डने के प्रति गंभीर नहीं है. आए दिन नये घोटाले सामने आ रहे हैं. उत्तराखंड आपदा में बरती जाने वाली लापरवाहियों पर भी अन्ना ने सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा खूब लता़डा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते बचाव और राहत कार्य तेज किया होता, तो बदइंजामी के कारण इतनी मौतें नहीं हुई होतीं. अन्ना को सुनने के लिए लोगों का हुजूम उम़ड प़डा था. इस दौरान लोगों ने अन्ना से अपनी समस्याओ के बारे में भी बताया. किसानों ने अन्ना से अपनी परेशानियों के बारे में भी बताया.

उत्तराखंड सम्बंधित अन्ना का प्रधानमंत्री को पत्र


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आदरणीय प्रधानमंत्री जी,  

उत्तराखंड की विभीषीका को आपने स्‍वयं देखा है, लेकिन अब जो समाचार आ रहे हैं, वे दिल दहला देने वाले हैं. तीन हजार से 15 हजार तक लोग मर चुके हैं, ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है. इस दैवीय आपदा में चारों धाम के तीर्थयात्री मरे हैं, पर उत्तराखंड की सरकार उन लोगों को अपनी सूची में शामिल नहीं कर रही है, जो स्थानीय निवासी थे. मैं अभी संपूर्ण उत्तराखंड की यात्रा से आया हूं और मैंने वहां इंफ्रास्ट्रक्चर की न केवल खस्ता हालात देखी है. बल्कि यह भी देखा है कि किस तरह से देख-रेख में लापरवाही बरती जा रही है. घाटियों में बसे गांव के गांव बह गए और गांव में रहने वाले लोगों की बड़ी संख्या इस आपदा का शिकार हो गई. यह बेहद दुखदायी है. इस भयानक स्थिति के बाद भी आपने उत्त‍राखंड की इस आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया है. मैं आपसे आग्रह करता हूं कि आप तत्‍काल उत्तराखंड में राष्ट्रीय आपदा घोषित करें, ताकि सरकारें अपने दायित्वो की गंभीरता को समझ सकें और प्राथमिकता के तौर पर इससे निपटने का इंतजाम कर सकें. इस आपदा का सामना करने में भारत की जनता को भी आगे आना चाहिए और मैं उनसे भी अपील करता हूं कि वे उत्तराखंड में अपनी जी-जान लगा कर लोगों की सहायता करें.

प्रधानमंत्री जी, यह आपदा दैवीय नहीं है, बल्कि यह आपदा मानवीय है. न सरकारों ने ध्यान दिया और न जनता ने. बेरहमी के साथ पेड़ काटे गए, बालू निकाली गई, खुदाई की गई और नदियों में मलवा और कचरा डाला गया. इस वजह ने प्रकृति को परेशान किया, जिसकी वजह से नदियों में बाढ़ आई, जिसने हजारों को लील लिया. पर्यावरण हमारे यहां सेमिनार या फैशन की चीज बनी हुई है, जबकि सरकार को चाहिए कि वह इसे आम जनता की जिंदगी का हिस्‍सा बनाए. लोगों को इस बात के लिए तैयार किया जाए कि अगर पर्यावरण शुद्ध नहीं हुआ, तो जनता इसी तरह की विभीषिकाएं और झेलेगी. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप आपदा प्रबंधन की संपूर्ण व्यवस्था के बारे में दोबारा सोचिए. लेकिन अभी भीषण बारिश के दो महीने बाकी हैं, उसमें क्या होगा, इसकी चिंता सरकारों में दिखाई नहीं देती. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप सभी राज्‍य सरकारों से कहें कि वह गंगा और यमुना सहित सारी नदियों की सेहत सुधारने के लिए तत्‍काल काम शुरू करें. मैं आपको विनम्रता से चेतावनी देना चाहता हूं कि अगर आज चूक हुई तो कल ये नदियां पहाड़ों के साथ मैदान में भी तांडव लीला करेंगी.

मैं देश की सभी स्वयंसेवी संस्थाओं से यह अनुरोध करता हूं कि वे उत्‍तराखंड में आए हुए संकट निवारण के लिए मानवता की दृष्टि से प्रयास करें. प्रधानमंत्री जी, मुझे बहुत सारे उत्तराखंड के लोगों ने कहा है कि आपके द्वारा भेजी गई सहायता राशि और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा दी गई सहायता राशि खर्च करते वक्त भारी भ्रष्टाचार हो सकता है. इसकी निगरानी की व्यवस्था की जाए, ताकि बाढ़ के बाद के निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार की थोड़ी भी गुंजाइश न रहे. मुझे डर है कि अगर ऐसा न हुआ, तो उत्तराखंड के बहादुर लोग आपकी सरकारों से निराश हो जाएंगे. मैं यह पत्र इस आशा से आपको लिख रहा हूं कि आप बिना विलंब किए उत्तराखंड के लोगों के बचाव, उनके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और उनके लिए रोजगार के अवसर जुटाने के काम को प्राथमिकता देंगे.

धन्यवाद
आपका
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कि. बा. तथा अण्णा हजारे,
रालेगणसिद्धी.